कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
वायुमंडल में उपस्थित ट्रेस गैसों (trace gases) में से एक, जिसका उद्गम प्राकृतिक भी है और कार्बन-समृद्ध जीवाश्म ईंधनों - जैसे पेट्रोलियम, खनिज कोयला, या प्राकृतिक गैस - के दहन, बायोमास (biomass) के जलने, साथ ही भूमि उपयोग में परिवर्तन और कुछ औद्योगिक गतिविधियों के कारण भी है। यह मानवजनित उद्गम की मुख्य ग्रीनहाउस गैस है, जिसकी वायुमंडलीय सांद्रता पिछली शताब्दी के मध्य से हमारी गतिविधियों द्वारा उत्पन्न उत्सर्जनों के समानांतर अत्यंत उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। 21वीं शताब्दी के दूसरे दशक के अंत तक यह आयतन के अनुसार 415 भाग प्रति मिलियन (parts per million) तक पहुँच जाती है। यह एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जिसका स्वाद हल्का अम्लीय होता है, जो उच्च सांद्रता में श्वासावरोध (asphyxiation) का कारण बनती है। यह ज्वलनशील नहीं है और जल में घुलनशील है। इसका वायुमंडलीय निवास समय (atmospheric residence time) 5 और 200 वर्षों के बीच होता है। कार्बन चक्र (carbon cycle) की जटिलता के कारण, विभिन्न प्राकृतिक निष्कासन प्रक्रियाओं से जुड़ी गैस अवशोषण की विभिन्न दरों के साथ, एक ही मान स्थापित नहीं किया जा सकता। इसका रासायनिक सूत्र CO2 है और इसे कार्बोनिक एनहाइड्राइड (carbonic anhydride) के नाम से भी जाना जाता है, या अब अप्रचलित पुरातन शब्द से, कार्बन बाईऑक्साइड (carbon bioxide)। जलवायु परिवर्तन अध्ययनों में "कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य" (carbon dioxide equivalent) की अवधारणा का प्रयोग किया जाता है, जिसे किसी दी गई ग्रीनहाउस गैस या उन गैसों में से कई के मिश्रण द्वारा उत्पन्न समान विकिरणी बल (radiative forcing, तापन) डालने के लिए आवश्यक CO2 की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है।
संबंधित पद: वैश्विक तापन, ग्रीनहाउस प्रभाव, जलवायु परिवर्तन