शहरी ऊष्मा द्वीप
शहरी जलवायु विज्ञान (urban climatology) में एक सुविज्ञात प्रभाव को दिया गया नाम, जो किसी बड़े शहर को ढकने वाली हवा में होने वाले तापन का वर्णन करता है। सड़कों की डामर और कंक्रीट, जिन कंक्रीट और अग्निसह (refractory) पदार्थों से भवन बने होते हैं, शहरी वातावरण में महत्वपूर्ण मात्रा में अवरक्त (infrared) ऊर्जा विकीर्ण करते हैं, जिससे हवा गर्म होती है। परिणाम एक प्रकार के गैसीय गुंबद (gaseous dome) का निर्माण है, जिसका तापमान परिधि की हवा के तापमान से अधिक होता है। वाहनों के दहन और चिमनियों से निकलने वाली गैसें भी ऊष्मा द्वीप में योगदान करती हैं, जिसका विस्तार और परिमाण अलग-अलग कारकों के अनुसार भिन्न होता है, जैसे कि मौसम की स्थिति, वर्ष का समय (कम या अधिक ठंडा वातावरण), और शहरी लेआउट की विशेषताएँ। जबकि दिन के दौरान शहर के केंद्र और उसके आसपास के तापमान में अंतर शायद ही कभी 3°C से अधिक होता है, रात में ऊष्मा द्वीप बहुत अधिक स्पष्ट होता है, और कुछ मामलों में 10°C तक का अंतर हो सकता है। प्रदूषकों की उपस्थिति ऊष्मा द्वीप की एक और विशेषता है, जो मुख्यतः यातायात और तापन (heating) से हानिकारक गैसों और कणों के उत्सर्जन के कारण होती है। सर्दियों की स्पष्ट वायुमंडलीय स्थिरता की स्थितियों में, जब शहर के ऊपर एक तापीय व्युत्क्रमण मौजूद होता है, तो खराब वेंटिलेशन उन प्रदूषकों की सांद्रता में क्रमिक वृद्धि में योगदान देता है, जो नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शहरी ऊष्मा द्वीपों का अध्ययन शहरी जलवायु विज्ञान में अनुसंधान के मुख्य क्षेत्रों में से एक है।