ध्रुवीय वाताग्र

एक काल्पनिक रेखा जहाँ ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय मूल की वायु राशियाँ अभिसरित होती हैं और परस्पर क्रिया करती हैं। यह उपोष्णकटिबंधीय प्रतिचक्रवातों और ध्रुवीय प्रतिचक्रवातों से आने वाली ठंडी वायु के बहिर्वाहों के मिलन क्षेत्र को चिह्नित करती है। यह दोनों गोलार्धों में गर्मियों में लगभग 50-55º अक्षांश पर और शीत ऋतु में 35-40º पर स्थित होती है। यह बड़े उर्मिलन (अंडुलेशन) प्रस्तुत करती है, जिनके इर्द-गिर्द वे वाताग्री निम्न-दाब तंत्र उत्पन्न होते हैं जो मध्य अक्षांशों की विशेषता वाले परिवर्तनशील मौसम के लिए उत्तरदायी हैं। इसके ऊपर ध्रुवीय जेट धारा प्रवाहित होती है।