लिक्टेनबर्ग आकृतियाँ
शाखाओं जैसी आकृतियाँ जो, टैटू की तरह, बिजली गिरने के बाद कुछ लोगों की त्वचा पर घंटों या दिनों तक दिखाई देती हैं। वे निशान त्वचा पर विद्युत निर्वहन (electrical discharge) के मार्ग को दर्शाते हैं। उनका लालिमायुक्त रंग त्वचा की छोटी सतही रक्त वाहिकाओं के फटने के कारण होता है, जो विद्युत धारा के गुजरने और उससे होने वाले अचानक तापन (heating) के कारण होता है। ये वृक्षाकार (arborescent) आकृतियाँ अपना नाम जर्मन भौतिक विज्ञानी और लेखक जॉर्ज क्रिस्टोफ लिक्टेनबर्ग (1742-1799) से लेती हैं, जिन्होंने सबसे पहले इन्हें विद्युत आवेशित प्लेटों पर देखा था। उन पर जमी धूल ने इन आकृतियों को बनाया। यह भग्न-ज्यामितीय (fractal-geometry) प्रतिरूप विद्युतरोधी (insulating) पदार्थों की सतहों पर और उनके भीतर दोनों जगह उत्पन्न होता है, जब एक निश्चित तीव्रता की विद्युत धारा उनसे होकर प्रवाहित होती है।